झारखंड विज्ञान मंच विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से विकास और सामाजिक परिवर्तन के लिए एक पंजीकृत फोरम है. इसका मकसद है विज्ञान और प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना, जन विज्ञानं आंदोलन के माध्यम से लोगों के साथ विज्ञान को जोड़ने, सामाजिक और आर्थिक विकास में स्वदेशी तकनीक का अधिकतम उपयोग के साथ साथ सामाजिक परिवर्तन के लिए यह मंच समर्पित है. संपर्क: jvmjkd@gmail.com या फोन : 06512441524
Wednesday, November 18, 2009
Saturday, September 5, 2009
vigyan shiksha
आप ने तो अपना इमेज ही बदल लिया है. एक टफ लोहा और स्टील टेक्नोक्रेट से सीधा वहा जहा आदमी बनते है. मेरी सद्भावना आप के साथ है.
Monday, August 17, 2009
"मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का बाल अधिकार विधेयक २००८" - असंवैधानिक, बाल विरोधी एवं शिक्षा विरोधी
प्रेस विज्ञप्ति
१ सभी बच्चो को सही मायने मे मुफ़्त शिक्षा नही मिल पायेगी.
२ स्कूली शिक्षा का निज़ीकरण बढेगा और शिक्षा मे मुनाफ़ाखोरी की व्यवस्था को प्रोत्साहन मिलेगा.
३ मुफ़्त और सन्तोषजनक तथा समान गुणवता वाली माध्यमिक शिक्षा का अधिकार नही मिलेगा.
4 हर सरकारी या निज़ी स्कूल समान रूप से अमीर - गरीब के लिये "पडोसी स्कूल" नही बन पायेगी.
५ विक्लान्गो के साथ हो रही गैर बराबरी ज़ारी रहेगी.
६ निज़ी स्कूलो मे मनमानी फ़ीस लेने का सिलसिला चलता रहेगा और प्रवेश की अनुमति फ़ीस तय करेगी.
७ सरकार आवश्यक धन मुहैया नही करा पायेगी और अन्ततः इसे बाज़ार पर छोड दिया जायेगा.
8 शिक्षको का आर्थिक, सामाज़िक एवम शैक्षणिक स्तर उंचा नहीं होगा.
९ शिक्षको को गैर शिक्षण कार्यो से मुक्ति नहीं मिलेगी।
झारखण्ड विज्ञान मंच ने अखिल भारतीय शिक्षा अधिकार मंच के संकल्प तथा इस बिल को वापस करने के उद्देश्य से राष्ट्रपति को लिखे गए अनुरोध पत्र का पूर्ण समर्थन करने का संकल्प दुहराया। गोष्ठी में वक्ताओ ने एक मत से यह विचार व्यक्त किया कि झारखण्ड विज्ञान मंच इस "मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का बाल अधिकार विधेयक २००८" के असंवैधानिक, बाल विरोधी एवं शिक्षा विरोधी चरित्र का विरोध करने वाले हर व्यक्ति या समूह का पुरजोर समर्थन करेगी. मंच ने गरीब, अल्पसंख्यक, और झारखण्ड की पिछडी जनता और बुद्धिजीवियों से इस विधेयक को पुरी तरह से खारिज करने की अपील की. बैठक की अध्यक्षता मंच के अध्यक्ष डा. वी. एन. शर्मा ने की.
(डा. वी. एन. शर्मा)
अध्यक्ष,
Wednesday, November 12, 2008
कोसी के पुनर्निर्माण को कैबिनेट की मंजूरी
पटना। कोसी नदी की बाढ़ से तबाह इलाकों का 14 हजार 808 करोड़ रु. की लागत से पुनर्निर्माण होगा। सरकार ने महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है जिसे मंगलवार को कैबिनेट की मंजूरी दे दी गयी। इसमें जन प्रतिनिधियों की भी भागीदारी रहेगी। बैठक में विश्वविद्यालयों के सेवानिवृत्त कर्मियों का बकाया, पेंशन भुगतान व कर्मियो के बकाया भुगतान के लिए दो सौ करोड़ की स्वीकृति दी गयी है। ग्रेटर पटना के विकास को महानगर योजना समिति नियमावली व नगरपालिका कैडर नियमावली को मंजूरी मिल गयी। वहीं अनुबंध पर सिटी मैनेजर की नियुक्ति को परीक्षा की जिम्मेदारी संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद को सौपी गई।
बैठक के बाद कैबिनेट सचिव गिरीश शंकर ने बताया कि उत्तर बिहार में कोसी की बाढ़ से भारी तबाही के बाद राहत व बचाव के पश्चात अब प्रभावित आबादी के दीर्घकालीन पुनर्वास, इलाके के पुनर्निर्माण की आवश्यकता है। इसके लिए कोसी पुनर्निर्माण एवं पुनर्वास नीति को मंजूरी दी गयी है। कोसी पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण परियोजना व्यापक बहु-प्रक्षेत्रीय परियोजना है। इसमें प्रभावित लोगों के मकान का निर्माण, सामुदायिक सुविधा, आधारभूत संरचना व्यवस्था, अर्थव्यवस्था एवं परिस्थितिकी को कायम रखने की नीति पर आधारित जीविका आदि का कार्यक्रम तैयार किया जाना है। नयी प्रक्रिया में प्रभावितों एवं संबंधित संस्थाओं जैसे पंचायती राज संस्थाएं, नगर निकायों को शामिल किया जाएगा और उनकी प्राथमिकता व आवश्यकता के आधार पर योजनाओं की रूपरेखा तैयार की जाएगी। निजी क्षेत्रों व गैर सरकारी संस्थाओं की भी मदद ली जाएगी।
कोसी पुनर्निर्माण के लिए तैयार कार्य योजना एवं अन्य नीतिगत निर्णयों की स्वीकृति मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति द्वारा दी जाएगी। इसमें उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री के अतिरिक्त संबंधित विभागों के मंत्री, मुख्य सचिव, विकास आयुक्त, वित्त सचिव, आपदा सचिव सदस्य होंगे। जिला स्तर पर जिला प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में अनुश्रवण समिति का गठन किया जाएगा जिसमें संबंधित क्षेत्रीय सांसद, विधायक, निकायों के अध्यक्ष व मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के सदस्य शामिल रहेंगे। कोसी नवनिर्माण एवं पुनर्वास की सभी योजनाओं की मंजूरी विकास आयुक्त की अध्यक्षता में नवगठित योजना प्राधिकृत समिति देगी। इसमें विभिन्न विभागों के सचिव रहेंगे।
इसके अलावा विधानमंडल का आगामी सत्र 2 दिसम्बर से आहूत करने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने हरी झंडी दे र्दी। 8 दिसम्बर तक चलने वाले सत्र के दौरान पांच बैठकें होंगी। 3 को द्वितीय अनुपूरक पेश किया जाएगा।
स्टाम्प नियमावली में संशोधन करते हुए नयी परिस्थिति में अब नये स्टाम्प वेंडरों की नियुक्ति नहीं करने का फैसला किया गया है। वहीं डाकघरों से न्यायालय शुल्क स्टाम्पों की बिक्री फ्रैंकिंग मशीन से प्रारंभ करने का निर्णय किया गया है। समाज कल्याण विभाग के प्रस्ताव पर चर्चा के बाद मानव व्यापार को रोकने एवं पीड़ितों के पुनर्वास के लिए राज्य कार्य योजना 'अस्तित्व' को मंजूरी दी गयी। राज्य में आईआईटी की स्थापना के लिए मेगा औद्योगिक पार्क के तहत प्रस्तावित 500 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की योजना का कुल 120.30 करोड़ के अनुमानित व्यय पर प्रशासनिक स्वीकृति देते हुए चालू वर्ष में 50 करोड़ रुपये आधारभूत संरचना विकास प्राधिकार को रिलीज करने की मंजूरी दी गयी। वहीं एनआईटी पटना के लिए मेगा औद्योगिक पार्क के अंतर्गत प्रस्तावित 100 एकड़ भूमि अधिग्रहण योजना का कुल 28.13 करोड़ के अनुमानित व्यय पर प्रशासनिक स्वीकृति तथा चालू वर्ष में 10 करोड़ रुपये आधारभूत संरचना विकास प्राधिकार को रिलीज करने की स्वीकृति दी गयी। इससे संस्थान को नया परिसर व भवन निर्माण का रास्ता साफ होगा। नये परिसर में विभिन्न स्नातक स्तरीय अभियंत्रण पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या में वृद्धि होगी। चूंकि एनआईटी पटना में 50 फीसदी सीटें एआईईईई के माध्यम से राज्य के छात्रों का नामांकन होता है इसलिए सीटों की संख्या में वृद्धि के फलस्वरूप संस्थान के 50 फीसदी सीटों पर राज्य के छात्रों के नामांकन की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। कैबिनेट ने राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम पटना के परिसमापन के प्रस्ताव को वापस लेने लेने पर अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है।
मुंबई पैसा जाएगा तो आदमी भी जाएगा: नीतीश
पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुंबई में बिहारियों की पिटाई के लिए जिम्मेवार मुंबई नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे व उसे समर्थन दे रही कांग्रेस सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि मुंबई में बिहार का पैसा जायेगा तो बिहारी भी वहां जायेगा। उन्होंने कहा कि बिहार का पैसा मुंबई में लगे ठाकरे व उसे समर्थन देने वाली कांग्रेस की नजर में यह ठीक है मगर यहां का आदमी पसंद नहीं। यह नहीं चलेगा।
मौलाना अबुल कलाम आजाद के जन्मदिवस पर मंगलवार को गांधी मैदान में आयोजित दो दिवसीय शिक्षा दिवस समारोह का गुब्बारे उड़ा कर उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री श्री कुमार ने कहा कि सूबे में कुछ लोग 'निराशा के मसीहा' बने बैठे हैं। वे जान लें कि हम बिहार को लाठी का नहीं ज्ञान का केंद्र बनाना चाहते हैं। अब लाठी को तेल पिलाने का जमाना नहीं है। हम लाठी में तेल नहीं कलम में रोशनाई भरने का काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर प्राथमिक स्कूल से बाहर रह रहे तकरीबन दस लाख महादलित व मुस्लिम समुदाय के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए महादलित शिक्षा व तालिमी मरकज योजनाओं का भी शुभारंभकिया। उन्होंने इसी माह चार सरकारी इंजीनियरिंग कालेजों को चालू करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर पटना की श्रीमती रुकमिणी बनर्जी को प्रथम मौलाना आजाद शिक्षा पुरस्कार के तौर पर दो लाख रुपये नकद तथा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस मौके पर अपने हाथों उन्होंने 18 बिहारी छात्र-छात्राओं को बिहार गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुंबई पर देश को नाज है,वहां देश भर की पूंजी लगी है। संविधान ने हर नागरिक को वहां बसने की आजादी दी है मगर वहां बिहारियों को जलील करने वालों की अब हम चलने नहीं देंगे। जोश भरे अंदाज में उन्होंने कहा कि हम सूबे का इतना विकास कर देंगे कि बिहार के छात्रों को तकनीकी पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना होगा बल्कि बाहर के लोगों को भी नौकरी करने के लिए यहां आना होगा। उन्होंने कहा कि सूबे में पांच नये मेडिकल खुलेंगे। इसके अलावा नेशनल इंस्टीच्यूट आफ फैशन टेक्नोलाजी सरीखे वे तमाम कोर्स जिनमें युवाओं की रूचि है बिहार में खोले जाने का विचार है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ मामलों में भले ही बिहार पीछे हो मगर कुछ मामलों में हम पथप्रदर्शक हैं। मौलाना आजाद के जन्मदिवस को शिक्षा दिवस के तौर पर दो साल से बिहार सरकार मना रही है। देर से ही सही केंद्र ने भी इसे मान लिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने तीन साल में स्कूल नहीं जा रहे 15 लाख बच्चों को दाखिल करवाया। दस लाख बाहर रहे महादलित व मुस्लिम बच्चों को चिह्नित किया गया है तथा उन्हें स्कूल में दाखिल करने की योजना चालू की गयी है। इसके तहत उनके ही समुदाय के लोगों के जरिये उनके पठन-पाठन, भोजन व रहने के स्थान की व्यवस्था की जायेगी। उन्हें पढ़ाने की क्षमता रखने वालों को सरकार मानदेय देकर प्रोत्साहित करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आयोजन के जरिये सरकार के प्राथमिक से उच्च शिक्षा के विकास के तीन साल के कार्यकलाप से जुड़े विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत करने की कोशिश की गयी है। समारोह में मानव संसाधन विकास मंत्री हरिनारायण सिंह,पूर्व विदेश राज्य मंत्री हरिकिशोर सिंह,इमारते शरिया के महासचिव सनाउल्लाह, अल्पसंख्यक आयोग के नौशाद अहमद व मदरसा बोर्ड,वक्फ बोर्ड व संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मौजूद थे।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने अभिवंचित वर्ग के बच्चों को स्कूल तक लाने में अहम योगदान करने के लिए पटना की श्रीमती रुकमिणी बनर्जी को प्रथम मौलाना आजाद शिक्षा पुरस्कार दो लाख रुपये नकद तथा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
समारोह में तकनीकी संस्थानों की प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफल पटना के शिति कंठ को आईआईटी 2008 तथा 39वें भौतिकी ओलंपियाड में गोल्ड मेडल प्राप्त करने पर डेढ़ लाख रुपये नगद, गया की भावना सिंह को सीएलएटी 2009 पीजी में प्रथम स्थान पाने पर एक लाख रुपये ,एआईआईएमएस 2008 में सफल पटना के डा. मधुकर दयाल को 50 हजार रुपये,आईआईटी जमशेदपुर परीक्षा में तीसरा स्थान पाने वाले दरभंगा के प्रणव कुमार सिंह को 50 हजार रुपये, नेशनल इंस्टीच्यूट आफ फैशन टेक्नोलाजी परीक्षा में तृतीय पटना के रोहित कुमार को 50 हजार रुपये, यूपीएससी सेंट्रल पुलिस फोर्स परीक्षा 2008 में दूसरा स्थान पाने वाले बांका के उत्ताम कश्यप को 50 हजार तथा अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष ओलंपियाड में स्वर्ण पदक विजेता दानापुर के शांतनु अग्रवाल को 50 हजार रुपये व प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। इसके अलावा बिहार संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में एक से तीन तक रैंक लाने वाले पटना के रमण रंजन, सुशांत कुमार, राहुल मयंक व अमित कुमार, नालंदा के विनय कुमार, खगड़िया की अनामिका भारती व प्रियंका भारती, जमुई की रजनी कुमारी, सिवान के बिनोद कुमार सिंह तथा गया के शशिकांत कुमार को तीस-तीस हजार रुपये प्रदान किये गये।
इससेपहले मुख्यमंत्री ने घूम-घूम कर वहां लगाये विभिन्न स्टालों का मुआयना किया। बाद में उन्होंने वहां आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी कुछ देर तक आनंद लिया।
Sunday, November 9, 2008
राहुल में रामुलु को देखिये
हरिवंश
मुंबई में मारे गये उत्तर भारतीय (जिनकी सूचनाएं सार्वजनिक हुई हैं)
1) 19 अक्तूबर - रामू दास - चलती ट्रेन से फेंका था, अब तक नहीं मिला - झारखंड के खूंटी का रहनेवाला - मजदूरी करता था।
2) 19 अक्तूबर - सकलदेव रजक - ट्रेन से फेंका, मौत - झारखंड के सिंदरी का - नौकरी की तलाश में था।
3) 19 अक्तूबर - पवन कुमार - पिटाई से हुई मौत - नालंदा का रहनेवाला - परीक्षा देने गया था।
4) 27 अक्तूबर - राहुल राज - एनकाउंटर में मरा - पटना का था - राज ठाकरे की तलाश में गया था।
5) 29 अक्तूबर - धर्मदेव राय - पिटाई से हुई मौत - उत्तर प्रदेश का था - मजदूरी करता था, छठ में घर लौट रहा था।गंभीर रूप से घायल
6) 30 अक्तूबर - दीनानाथ तिवारी, पत्रकार - भगवती अस्पताल में भरती - हिंदी पट्टी का - रिपोर्टिंग के दौरान गंभीर पिटाई।
अब तक मुंबई या महाराष्ट्र में पांच उत्तर भारतीयों के मारे जाने की पुख्ता सूचना है। राज ठाकरे के ऐसे आंदोलनों के आरंभिक चरणों में नासिक, नागपुर से लेकर अन्य जगहों पर भी उत्तर भारतीय मारे गये। अपमानित हुए। कई इलाकों से रातोंरात उन्हें भागना पड़ा। हजारों की संख्या में उनकी टैक्सियां या ऑटो तोड़े गये। पान की दुकानों पर हमले हुए। यहां इन घटनाओं के ब्योरा देने का मकसद, लंबी सूची देना नहीं है। हालांकि कोई युवा समूह या एनजीओ, महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में हिंदी पट्टी के लोगों के साथ हुए भेदभाव, अपमान, अत्याचार, हत्या, मारपीट और उजड़ जाने की घटनाओं को एकजुट कराता, तो आधुनिक भारत का महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार होता। दस्तावेज इन नेताओं के लिए नहीं, शासकों के लिए नहीं, बल्कि खुद हिंदीभाषी लोगों के लिए। अतीत के इस दस्तावेज से भविष्य के लिए सबक मिलेंगे।इन वारदातों में राहुल राज की घटना दूरगामी है। अब तक प्राप्त सूचनाओं के अनुसार राहुल, पटना के कदमकुआं का रहनेवाला था। 26 अक्तूबर को वह मुंबई गया था। काम की तलाश में। पर क्या हुआ कि राहुल राज, राज ठाकरे को ढूंढने निकल पड़ा? कोई अधिकारिक ब्योरा नहीं है। सूचना है कि राहुल शांत प्रवृत्ति का लड़का था। इंट्रोवर्ट। उसके मानस पर जब बिहारियों या हिंदीभाषियों के अपमान की बात आयी होगी, तो लगता है उसके अंदर युवा आक्रोश बौखलाने लगा होगा। फिर भी उसने कहीं कोई हिंसा नहीं की। न बस में यात्रा कर रहे सहयात्रियों के साथ या न किसी अन्य मुंबईवासी के साथ। वह हिंसक होता, तो उसने किसी पर गोली चलायी होती। कहीं कोई हिंसा की होती। वह बार-बार यात्रियों से कह रहा था, मैं आपको नुकसान नहीं पहुंचाऊंगा। मुंबई के जो लोग उसके साथ बस में थे, उनका विभिन्न चैनलों पर बयान था, पुलिस समझदारी से काम लेती, तो आसानी से वह पकड़ा जाता। उसे राज ठाकरे को ही मारना होता, तो वह बस हाइजैक क्यों करता? शायद उसके दिमाग में अपने गुस्से को इसी तरह सार्वजनिक बनाने की योजना रही हो। बिना किसी को कोई हानि पहुंचाये। पर महाराष्ट्र पुलिस ने उसकी हत्या की। इसके बाद वहां के गृहमंत्री आरआर पाटील का बयान आया, गोली का जवाब गोली से देंगे। लगता है, महाराष्ट्र में राज ठाकरे बनने की होड़ लग गयी है। उपमुख्यमंत्री आरआर पाटील हों या छगन भुजबल या नारायण राणे या मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख। सबके आचरण, काम और बयान देश का संकट बढ़ानेवाले हैं। हिंदीभाषी क्षेत्रों में भी जो हिंसक प्रतिक्रिया हुई, विरोध के कटु शब्दबाण चले, वे देशहित में कतई नहीं। आज भारत को एक रखना सबसे बड़ा एजेंडा है। शायद यह गलत है, क्योंकि देश तो किसी के एजेंडे पर है ही नहीं। बहरहाल आरआर पाटील से गृहमंत्री शिवराज पाटील या भारत सरकार को यह अवश्य पूछना चाहिए कि जब हिंदी पट्टी के युवा पीटे जा रहे थे, उनकी हत्याएं हो रही थीं, तब महाराष्ट्र प्रशासन और पुलिस कहां थे? दाउद इब्राहिम के गुंडे मुंबई में आतंक मचाते रहते हैं, तब आरआर पाटील की यह गोली कहां चली जाती है? मुंबई में उग्रवादी बेखौफ विस्फोट करते हैं, तब आरआर पाटील की यह बहादुरी कहां रहती है?
Friday, November 7, 2008
Green plastics, an option to save environment
Hundred per cent biodegradable plastics is the only option to save the environment, especially in the growing economies of India and China
Published on 11/7/2008 12:44:06 PM
By Neena Bhandari
Melbourne: With plastic garbage becoming the bane of modern societies, an Indian Australian scientist says 100 per cent biodegradable plastics is the only way to go, especially in the growing populated economies of India and China.
"We are providing bio-responsible material solutions for the world market that deliver all the functionality of conventional petrochemically derived plastics in an economical, totally organic and eco-sensitive way," Melbourne-based Plantic Technologies' Chief Technology Officer (CTO) Kishan Khemani said.
Plantic Technologies manufactures starch-based polymers for packaging and other applications. Its novel technology is based on the use of high-amylose corn starch, a material derived from annual harvesting of specialised non-genetically modified (hybrid) corn unlike other bioplastics companies which convert corn starch into polymers through a complex and expensive refinery process.
"This type of starch with its unique chemical and film-forming properties allows development of a range of applications across conventional plastics markets. It is not only renewably sourced, it is biodegradable and compostable unlike petrochemically derived plastics that create significant waste management costs and major environmental problems," the CTO said.
The plastics market worldwide is about 100 million tonnes and the Asia-Pacific region caters for 19 per cent of it.
"We are doing some trials with Cadburys India for chocolate boxes and will be exploring other opportunities in India as with growing affluence, use of plastics in packaging will only grow," Khemani said.
The Chief Technology Officer sees bioplastics as the only alternative to petrochemical-based plastics, especially as crude oil resources diminish and prices spiral.
He said, "Almost 50 per cent of consumers consider at least one sustainability factor in selecting consumer packaged goods items and at the same time brand owners and retailers are demanding 'green' products. Our bioplastic uses on an average 40 per cent less energy across its entire life cycle than fossil fuel plastics."
The growth rate of petrochemical plastics is five percent per annum, but as people and governments commit to reducing greenhouse gas emissions, the market for bio-polymers is forecast to grow by 230 per cent to three lakh tonnes over the next five years.
Sustainable bioplastics may be classified as polymers using biomass, polysaccharides (starch, cellulose), protein and lipids and those derived from micro-organisms or plant cells and bio-derived monomers such as lactic acid.
From food and beverage packaging to medical, automotive and aerospace applications, the Plantic technology is being used by many international companies—WalMart, Toyota, GM, DuPont, Dow, Cadbury Schweppes, Nestle, Kellogs, Kraft, Lindt—going the 'green' packaging way.
Plantic's Biodegradable Lethal Ovitrap (BLO), which is a faster, cheaper and environmentally safer way of killing mosquitoes than interior spraying techniques, can also be very useful in India for controlling the spread of dengue.
Khemani said, "The dengue mosquito lays its eggs in a container of water such as the BLO. An insecticidal strip is placed inside the bucket, creating a 'booby trap' that kills the mosquito and the eggs before they have the opportunity to spread dengue. It eliminates the risk of traps becoming breeding sites when the insecticide becomes inactive."
--